1. तुम्हारे इरादे पता है मुझे कहती हो कुछ और करती हो कुछ लबों पर वफा की बातें मगर दिल में कुछ और पलता है अब तेरे झूठ की आहट पहचानने लगा हूं चेहरे पर मासूमियत मगर दिल में कुछ और छुपा कर रखती हो। 2. तेरी नखरो से मिजाज बिगड़ जाता है दिल हर बार तेरे इश्क में उलझ जाता है तू प्यार से एक बार देख ले मेरी हर धड़कन पर तेरा नाम ठहर जाता है। 3. दिल लगाने में मुश्किल बहुत है हर कोई दिल के काबिल नहीं होता यहां चेहरे की नहीं नियत की पहचान होती है जो दिल तक पहुंचे वो आम नहीं होता। 4. मैंने माना मैं यहां गलत हूं लेकिन इसका मतलब ये नहीं हर इल्जाम का हकदार हूं मैं फैसला करने से पहले सच का चेहरा देख लेना हर खामोश इंसान गुनहगार नहीं होता।
शायरी डायरी | हिंदी शायरी | शायर मनोज कुमार
तुम्हारी हर बात सही है मैं हकीकत से रूबरू होने लगा हूं गलतफहमियां दूर होने लगी है वक्त की नजाकत समझने लगा हूं
अपने वादों पर खरा उतरने लगी हो खुशनसीब हूं जो बेहद प्यार करने लगी हो मुझे हर खुशी मिल गई है महसूस हो रहा है एक नई जिंदगी मिल गई है