1. तुम्हारे इरादे पता है मुझे कहती हो कुछ और करती हो कुछ लबों पर वफा की बातें मगर दिल में कुछ और पलता है अब तेरे झूठ की आहट पहचानने लगा हूं चेहरे पर मासूमियत मगर दिल में कुछ और छुपा कर रखती हो। 2. तेरी नखरो से मिजाज बिगड़ जाता है दिल हर बार तेरे इश्क में उलझ जाता है तू प्यार से एक बार देख ले मेरी हर धड़कन पर तेरा नाम ठहर जाता है। 3. दिल लगाने में मुश्किल बहुत है हर कोई दिल के काबिल नहीं होता यहां चेहरे की नहीं नियत की पहचान होती है जो दिल तक पहुंचे वो आम नहीं होता। 4. मैंने माना मैं यहां गलत हूं लेकिन इसका मतलब ये नहीं हर इल्जाम का हकदार हूं मैं फैसला करने से पहले सच का चेहरा देख लेना हर खामोश इंसान गुनहगार नहीं होता।
फजीहत शायरी संग्रह
प्यार का भरोसा देकर फजीहत किया है वफा करता रहा समझ नहीं आया मेरा क्या कसूर रहा है यह सोचकर मन उदास आंखें नम रहती हैं
वह गलतफहमी में फजीहत किए जा रही है अपनी बेगुनाही का सबूत नहीं है बस तकलीफ में जिए जा रहा हूं सादगी से एकतरफा मोहब्बत किए जा रहा हूं
तुम्हें हकीकत से रूबरू कराने का उपाय ढूंढने लगा हूं रोज की फजीहत से निजात पाना चाहता हूं फिर अपने चेहरे पर मुस्कान चाहता हूं
मेरे खुशी का ध्यान रखने लगी है जबसे सच्चाई से रूबरू हो गई है बेतहाशा प्यार करने लगी है जो पहले फजीहत किया था उसके लिए हर बात में माफी मांगने लगी है
मन की ख्वाहिशों में, तुम्हारे फजीहत का रोष है तनहाई में दिन गुजर रहा है जो कृत्य कर रही हो खो गया सब होश है
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